भाजपा के पक्ष में आगामी राष्ट्रपति चुनाव!

हालहि में उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत हासिल हुआ है| ऐसे में इस बार होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी भाजपा फायदे में दिख रही है | राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का पांच साल का कार्यकाल 24 जुलाई, 2017 को समाप्त हो रहा है| वहीं उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त, 2017 को समाप्त होने वाला है| यह चुनाव बीजेपी के लिए अपनी पसंद का राष्ट्रपति चुनने का भी है| वही विधानसभा चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के बाद विपक्ष एक बार फिर एकजुट होता दिख रहा है| पीएम मोदी का विजयरथ रोकने और राष्ट्रपति चुनाव के मददे नजर विपक्ष एकजुटता दिखा रहा है| पहले बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करी | जिसके बाद मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सोनिया गांधी से मुलाकात  और अब लालू भी सोनिया गांधी से मुलाकात करने जा रहे है|आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह मुलाकात विपक्ष कि बोखलाहट को दर्शाता है | सूत्रों के मुताबिक येचुरी ने सोनिया से आगामी राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा की है,और कई मौकों पर वाम दल, जेडीयू, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, बीएसपी, टीएमसी और एनसीपी बीजेपी पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाते हुए एकजुट होने की बात कह चुकी है| इस मुलाकात के बाद अटकलें लगने लगी हैं कि क्या विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगा? लेकिन लगभग यह तय है कि ज्यादातर राज्यों और केंद्र में बीजेपी की सरकार होने के कारण भाजपा आसानी से किसी भी अपने चेहरे को राष्ट्रपति बना लेगी| एनडीए के उम्मीदवार के ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतारने के लिए कांग्रेस विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में दिख रही है | हालांकि ममता बनर्जी के अलावा किसी और विपक्षी नेता ने इस मामले में अपनी राय ज़ाहिर नहीं की है| राष्ट्रपति चुनाव के 10, 98, 882 के निर्वाचक मंडल में राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों के साथ राज्यों की विधानसभाओं के चुने प्रतिनिधि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पुडुचेरी के केंद्र प्रशासित राज्य में एनडीए के पास 5, 49, 442 वोट हैं| राष्ट्रपति के लिए जो जरूरी वोट है, मौजूदा समीकरण केंद्र के सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में है| एनडीए के पास जितने सांसद और विधायक हैं| उसके हिसाब से मोदी को राष्ट्रपति चुनाव में अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने में थोड़ी भी मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी| राष्ट्रपति चुनाव के लिए जितने वोटों की जरूरत है मौजूदा गठबंधन के पास लगभग सिर्फ 20 हज़ार वोटों की कमी है, जिसका इंतजाम करना कोई मुश्किल नहीं है| तो सवाल उठता है कि सोनिया-नीतीश के मुलाकात के क्या मायने हैं? पिछले काफी समय से विपक्ष ने कई मुद्दों पर साथ आकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की है| लेकिन कई मौकों पर उसे सफलता नहीं मिल सकी है| नीतीश-ममता समेत कोई भी ऐसा नेता नहीं है, जिसका एक राज्य के बाहर जनाधार हो| केवल कांग्रेस की उपस्थिति कई राज्यों में हैं लेकिन राहुल गांधी की अगुवाई में कितने दल राजी होंगे ये भी सवाल होगा| राज्यों में आपस में भिड़ीं पार्टियों का क्या होगा? बंगाल में कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस-लेफ्ट किस हद तक साथ आएंगे| साउथ में क्या डीएमके-एआईएडीएमके साथ आएंगे? यूपी में सपा-बसपा-कांग्रेस-आरएलडी क्या साथ आ सकेंगे| यह एक कोरी कल्पना सा लगता है, कि विपक्ष एकजुट हो रहा है | सही मायने में विपक्ष अपना जनधार खो चुका है और आगमी राष्ट्रपति चुनाव में भी उसे कुछ हासिल नहीं होना है | इसी बीच राष्ट्रपति उमीदवार को लेकर भी कयास लागये जा रहे है | भाजपा में मुरलीमनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवानी का नाम सबसे उपर नजर आ रहे है, और वही विपक्ष का उमीदवार शरद यादव के रूप में देखा जा रहा है | विपक्ष शरद यादव के रूप में आम सहमती बनाने कोशिश भी कर रहा है | लेकिन अभी ये सिर्फ संभावना ही है | लेकिन इस राष्ट्रपति चुनाव में यह तय माना जा रहा है , कि इस बार राष्ट्रपति एनडीए (भाजपा) का ही बनेगा |

               

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