निर्भया को मिला इंसाफ!
भारत की संस्कृति में नारी को बहुत सम्मान दिया दिया गया है। पुराणों में
भी कहा गया हैं जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते
हैं| वहां कभी भी किसी चीज
की कमी नहीं आती। परन्तु हम बात करें वर्तमान की तो हालात बहुत ही दयनीय हैं।महिलाओं
के साथ हर रोज अपराध हो रहें हैं| कभी वो घरेलु
हिंसा तो कभी रेप का शिकार बन रहीं हैं। मर्द उन्हें बस एक भोग की वस्तु समझकर
इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका जीता जागता सबूत निर्भया कांड के
रूप में आज भी मौजूद है| निर्भया कांड के बारे में सोचकर आज भी रोगटे खड़े हो जाते
है|16 दिसंबर 2012 की दिल्ली की वह सर्द रात थी| बढ़ती सर्दी के साथ
सड़क पर ट्रैफिक भी कम था| नौ बजे के करीब एक लड़की अपने
दोस्त के साथ दक्षिणी दिल्ली के मुनीरका इलाके में अपने घर पालम विहार जाने के
लिए इंतजार कर रही थी| उनको साधन तलाशने में आधे घंटे लग गए| घर पहुंचने की जल्दी
के बीच तकरीबन साढ़े नौ बजे एक सफेद बस रुकी| उसमें से एक शख्स ने
उन लोगों को बस में चढ़ने का ऑफर दिया| उस बस में ड्राइवर समेत छह लोग पहले से
मौजूद थे| थोड़ी देर बाद उन दरिंदों ने वह कृत्य किया जिससे मानवता भी
शर्मसार हो गई| उन्होंने उन दोनों के साथ बेहद बर्बरता दिखाते हुए पहले
निर्भया के साथ गैंगरेप किया और उसके बाद दोनों को बुरी तरह से पीटा और महिपालपुर
फ्लाईओवर के पास उनको फेंक कर चले गए| कराहते युवक ने किसी तरह पीसीआर वैन बुलाई| जिसने उनको अस्पताल पहुंचाया| देश की अंतरात्मा को झकझोरने वाली उस घटना के 11 दिनों के बाद निर्भया की मौत हो गई| गुनहगारों को पकड़ा
गया| इससे दुनिया भर में हमारी छवि केवल दागदार ही नहीं हुई बल्कि इसे महिलाओं के
खिलाफ हिंसा के लिहाज से असुरक्षित मुल्कों की श्रेणी में प्रमुखता से शुमार किया
गया| सभी 6 आरोपियों के खिलाफ बलात्कार अपहरण और हत्या का मामला दर्ज हुआ| फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चला| 13 सितंबर 2013 को चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई और
नाबालिग को तीन साल की अधिकतम सजा के साथ सुधार केंद्र में भेज दिया गया| 13 मार्च
2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी फांसी की सजा को
बरकरार रखा| पूरे देश और सिस्टम को झकझोर देने वाले निर्भया गैंगरेप केस
में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया| सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के
चारों हत्यारों की फांसी की सजा बरकरार रखी| इस मामले में कुल 6 लोग आरोपी थे| 6 दोषी जिन्होंने 16 दिसंबर 2012 की रात वहशीपन की सारी हदें पार कर दी थीं| जिनकी वजह से आज
निर्भया हमारे बीच नहीं है| सरकारी आंकडो के मुताबिक 2015 के दौरान पूरे देश में
रेप के 32077 मामले दर्ज किए गए| इनमेंदिल्ली हाई कोर्ट से लगभग 17 सौ मामले गैंगरेप के थे| नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो
(एनसीआरबी) के आंकड़ों के हवाले राज्यसभा में ये जानकारी दी गयी थी | यह आंकड़ा उन
मामलों पर आधारित है जो पुलिस तक पहुंचे| लेकिन भारत में अब भी लोक-लाज सामाजिक दबाव और अभियुक्तों की दबंगई के चलते आधे से ज्यादा मामले
पुलिस तक नहीं पहुंच पाते| खासकर ग्रामीण इलाकों में बहुत कम
मामलों में ही रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है| ऐसे में असली स्थिति का अनुमान सहज ही
लगाया जा सकता है| यह हालत तब
है कि जबकि दिसंबर 2012 में दिल्ली
में एक छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप की घटना ने पूरी दुनिया में सुर्खियां
बटोरी थीं| उसके बाद सरकार ने कानून में कई संशोधन किए| लेकिन बावजूद उसके ऐसे
मामले लगातार बढ़ रहे हैं| निर्भया कांड के
बाद बढ़े सुरक्षा उपायों के बावजूद आखिर रेप के मामले घटने की बजाय बढ़ क्यों रहे
हैं| गैर-सरकारी संगठनों का कहना है कि देश
की जटिल न्याय प्रणाली की वजह से लंबे खिंचते मामले और ज्यादातर मामलों में सबूतों
के अभाव में अभियुक्तों का बरी हो जाना इसकी प्रमुख वजह है| रेप के मामलों में
अभियुक्तों को सजा मिलने का राष्ट्रीय औसत 28 फीसदी है, लेकिन राजधानी दिल्ली में यह दर महज 17 फीसदी है|
इससे अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं|ऐसे मामलों की पुलिसिया जांच ठीक से नहीं
होना पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाने की सबसे बड़ी वजह है| जांच के दौरान हुई
खामियों के चलते अभियुक्त अक्सर अदालत से बेदाग छूट जाते हैं|"निर्भया के गुनहगारों पर कोई रहम नहीं कर सुप्रीम
कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है | इस फैसले से समाज में फेल रही बलात्कार
रूपी बुराई पर कही न कही लगाम लगेगी | और जो लोग इस प्रकार की मानसिकता से ग्रसित
से वो लोग भी ऐसे अनेतिक कार्य करने से पहले कई बार सोचेगे |
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