बैंक एकाउंट पोर्टेबिलिटी पर फिर शुरू किया जाए काम!
बैंकों को एकाउंट पोर्टेबिलिटी के लिए काम करना आज समय की मांग बनते जा रहा है। प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और ग्राहक सेवा में सुधार के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। बैंकिंग लोकपाल के वार्षिक सम्मेलन में कहा गया है , कि नई पीढ़ी के ग्राहकों को और ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराने के लिए बैंकों को प्रयास करने चाहिए। आज की पीढ़ी ज्यादा टैक्स सेवी है। आज के माहौल में ग्राहक अगर सेवाओं से असंतुष्ट है तो वह आसानी से एक संस्थान से निकलकर दूसरे संस्थान का रुख कर सकता है। जिससे ग्राहकों को भी एक मौका मिल सके और वह अपना असंतोष जाहिर कर सके । प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बैंकों पर भी एक दबाव बना रहेगा । यहाँ बात फिर विश्वस्नीयता की आ जायगी । जिसका सीधा असर बैंकों पर होगा । साथ ही बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाना पढ़ेगा । बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी सुविधा लागू होती है तो मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तर्ज पर बैंक बदलेगा , लेकिन खाता नंबर वहीं रहेगा। पहले के लेन-देन (क्रेडिट-डेबिट हिस्ट्री) का ब्यौरा भी यथावत रहेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बैंक अपनी सर्विस पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देंगे। यदि वे ...